भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री पिछले पाच सालों में काफी आगे बढ़ चुका है। हम आधुनिक टेक्नालाजी का प्रयोग कर रहे हैं, जम कर ग्राफिक्स का फ़ायदा उठा रहे हैं। हर किसी के दिमाग में हिंदी फिल्मो से मुकाबला करने की बात चल रही है। पर आज भी कुछ चीज़ें हैं, जोकि भोजपुरी सिनेमा को सीमित रखे हुए है। उन चीजों में बहुत ख़ास महत्त्व है पब्लिसिटी का, फिल्मो के प्रचार का। फिल्म बनाना एक टीम वर्क है, हर विभाग को अपना काम पूरी जिम्मेदारी से करना होता है। फिल्म के हर पक्ष का सही होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि फिल्म की एक कमी भी उसे डुबाने के लिए काफी होता है। और आज के समय में, जब फिल्मो की लागत और उसके प्रचार के लागत को बराबर अहमियत देनी चाहिए, भोजपुरी सिनेमा में ऐसा कुछ चलन आया ही नहीं है।
एक तरफ जहां हिंदी फिल्मों को पूरा करने के बाद १-२ महीने जम कर उसकी पब्लिसिटी की जाती है, वहीँ दूसरी और, भोजपुरी फिल्मो का खेल बहुत अलग है। यहाँ इंतज़ार होता है फिल्म के पूरा होने का, फिल्म पूरी हुई नहीं कि बस रिलीज कर दिया। कारण साफ़ है, भोजपुरी फिल्मों के निर्माता शुरू में अगर ८० लाख रुपये का फिल्म का बजट और २० लाख रुपये पब्लिसिटी बजट लेके चलते हैं तो फिल्म ख़त्म होने तक ही उनके १ करोड़ ख़त्म हो चुके होते हैं, पब्लिसिटी के लिए कुछ बचता ही नहीं है निर्माताओं के पास। फिल्म ख़त्म होने तक निर्माता इतना ज्यादा परेशान हो जाता है कि उसे बस एक ही चीज़ दिखती है "फिल्म को रिलीज करो"।
जब भोजपुरी के एक निर्देशक महोदय से हमारी इस बारे में बात हुई तो उनका कहना था कि इस मामले में एक बहुत बड़ा रोल हमारे इंडस्ट्री के नायक भी निभाते हैं। निर्देशक महोदय के हिसाब से आज भोजपुरी के नायकों कि फीस इतनी बढ़ चुकी है एक निर्माता उसी में फसा रह जाता है। फिल्म के लागत का आधा तो हमारे नायक ही ले जाते हैं, फिर फिल्म पूरी करना और उसका प्रचार करना बहुत कठिन हो जाता है। जब उनसे इस समस्या का हल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "भोजपुरी नायकों को अपनी फीस कम करनी चाहिए और अगर ना हो तो फिल्म के लाभ का एक उचित भाग भी लें, इससे कम से कम फिल्म का प्रचार तो सही ढंग से हो सकेगा"।
वर्तमान में हम भोजपुरी फिल्मों के क्वालिटी पर काफी बहस सुन रहे हैं। बहुत से लोगों का कहना है की फलां फिल्म साफ़ होते हुए भी सिनेमाघरों में सिर्फ ३-४ दिन ही टिक पाई। पर वही लोग इस बात का ध्यान नहीं देते की कितने लोगों को पता था कि वह फिल्म रिलीज हो रही है, उसमें क्या खासियत है, कैसे गाने हैं। आज जब कि हम हिंदी फिल्म भी चुन-चुन के देखते हैं(जिनका बहुत अच्छे तरीके से प्रचार होता है), तो हम यह कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि बिना किसी प्रचार के, बिना धूम धडाके के फिल्म को रिलीज कर के अपने पैसे भी निकाल लेंगे ? फिल्म का अच्छा होना बहुत ही जरूरी है, पर उन अच्छाइयों का प्रचार होना भी उतना ही जरूरी है, नहीं तो फिल्में ऐसे ही आती और जाती रहेंगी।
आज कि दुनिया प्रचार प्रसार के दम पर ही टिकी हुई है, जो जितना दर्शकों को लुभा ले, उसे उतना ही फायदा मिलेगा। हाँ, इसमे कोई शक नहीं कि अंत में फिल्म कि क्वालिटी ही फिल्म के भविष्य को तय करती है पर अच्छी शुरुआत भी हर फिल्म को आज के तारीख में बहुत प्रभावित करती है। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को अपनी बेहतरी के लिए यह बात कभी ना कभी तो समझनी ही पड़ेगी।
Source : EDITORIAL
6 comments posted (Showing 1 to 6)Kripya Article likhne wale ka name bhi publice karen
Posted by : Mahendra Prajapati at 15:28:01 on 2011-12-21 See_User_Profile
Kripya Article likhne wale ka name bhi publice karen
Posted by : Mahendra Prajapati at 15:28:01 on 2011-12-21 See_User_Profile
हाँ ये सही है कि PUBLICITY तो होनी ही चाहिए जब तक PUBLIC नही जानेगी तब तक वो देखेगे नहीँ
Posted by : Nagendra kushwaha at 15:23:22 on 2011-12-21
bhojpuri film bahut achi bt logo tak pahunchane k liye publicity honi chahiye..aur uske liye bhojpuri cine jagat ko samajhna chaiye..........aur uspe dhyan de............
Posted by : rajeev kumar at 17:49:58 on 2011-09-08
a aap ne sahi likha hai , aaj bhi publicity n honay ke karan bohjpuri film pit rahi hai. harish jaiswal
Posted by : harish jaiswal at 10:36:08 on 2011-06-22
किसी भी फिल्म की पुब्लिसिटी उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण चीज है . फिल्म के नायक नायिका प्रचार में योगदान दे सकते है
Posted by : Shatrughan rai at 16:50:32 on 2011-05-20
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