सिनेमाघरों के दुर्दशा की जिम्मेदार है सरकार

2010-12-24

सिनेमाघरों के दुर्दशा की जिम्मेदार है सरकार भोजपुरियासिनेमा॰काँम के द्वारा हमने हमेशा कोशिश की है कि हम हर पक्ष को सबके सामने रख सकें। इसी संदर्भ में मेरी नज़र पड़ी एक प्रसिद्ध न्यूज़ पोर्टल के एक लेख पर जिसका नाम रखा गया था “बदहाली: बढ़ती जा रही सिनेमा हालों की दुर्दशा”। इस लेख में लेखक साहब ने बड़े ही आराम से सिनेमा हाँलों की दुर्दशा का जिम्मेदार सिनेमाघरों के मालिकों को ठहरा दिया। पर शायद उन्होंने इस बात का ध्यान नही दिया कि सिनेमाघरों की जिम्मेदारी जितनी सिनेमाघरों के मालिक की है, उतनी ही हमारे सरकार की। क्योंकि उस लेख में बलिया के सिनेमाघरों की बात की गई थी, तो आइये हम बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के सिनेमाघरों के मालिकों की बदहाली का जिम्मेदार कौन है।

1॰ उत्तर प्रदेश सरकार ने सन 1978 में एक आदेश पास किया था कि सिनेमाघर मालिक अपना सिनेमा तोड़वा कर कोइ भी व्यावसायिक इमारत नहीं बनवा सकते और अगर वे ऐस करते है तो उन्हें भारी जुर्माना देने के बाद ही यह अनुमति मिलेगी। क्या यह हमारे संविधान का उलंघन नहीं है जो कि हमें अपने ही जमीन पर कुछ भी करने से रोकता है ? पर सन 1978 की बात याद कौन रखेगा ? यह सरदर्द तो सिर्फ़ सिनेमाघरों के मालिकों का है। 2॰ जब सरकार ने सन 1978 में यह आदेश लागू किया था, तो उसने इस बात का बचाव यह कह के किया था कि सिनेमा आम आदमी के मनोरंजन का साधन है और किसी को भी यह हक नहीं है कि वह आम आदमी के मनोरंजन को रोके। ठीक उसी समय, उत्तर प्रदेश के सरकार ने बड़े शौक से “उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम” का निर्माण किया जो करीब 40 जगहों पर सरकारी सिनेमाघरों में फ़िल्में दिखाने के लिये बनाया गया था। 10 साल के अन्दर “उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम” के सभी सिनेमाघर बन्द हो गये और फ़िर बाद में उन्हें दूसरे व्यावसायिक कामों में लगा दिया गया। यहाँ अपने सरकार को आम आदमी के मनोरंजन का ख्याल नहीं आया ? 3॰ जून 2009 में हमारी सरकार ने टिकटों के रेट कम करने का एलान किया। साफ़ बतायें तो जून 2009 में हमारी सरकार “आँकड़ों का बाज़ीगर” बन गई। टिकट कम करने का एलान कर के हमारी सरकार ने बहुत शानदार गेम खेला। पहले हमारी सरकार नेट पर 60% टैक्स लेती थी, पर अब इस एलान के बाद हमारी सरकार ने टोटल पर टैक्स लेना चालू किया। उदाहरण के लिये मान ले कि अगर हमारे सरकार को पहले 16 रुपये में 6 रुपये बतौर टैक्स मिलता था, तो इस एलान के बाद उसे 6.40 रुपये मिलने लगे। इसे कहते हैं असली कलाकार। 4॰ जून 2009 में ही हमारी सरकार ने मेन्टेनेंस टैक्स को खत्म कर दिया। यह टैक्स सिनेमाघर के मालिको को जाता था ताकि वह अपने सिनेमाघर के रखरखाव में यह पैसे खर्च कर सकें। पर इससे सरकार के टैक्स में कमी होने लगी शायद इसलिये इसे भी खत्म कर दिया गया। 5॰ आम आदमी की चिन्ता करते करते हमारे सरकार ने मल्टीप्लेक्सेस को 5 वर्ष तक अनुदान देने की घोषणा की, सिनेमाघर में तो ज़ीव जन्तु ही जाते हैं, इसलिये उसकी फ़िक्र सरकार ने नही की। 6॰ क्या आपको पता है कि सिनेमाघरों के हर टिकट में से 50 पैसे फ़िल्म विकास निधि को जाता है, आज उत्तर प्रदेश के फ़िल्म विकास निधि के पास अरबों की सम्पत्ति है, पर फ़िर भी इस प्रदेश में कोइ विकास नहीं है, क्यों ? 7॰ क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश सिनेमाघरों से बाकि सभी राज्यों से कई गुना ज्यादा टैक्स लेती है ? 8॰ क्या आपको पता है कि हमारे ही सरकार ने बड़े शौक से यह घोषणा की थी कि कोइ भी फ़िल्म जिसकी 60% से ऊपर शुटिंग उत्तर प्रदेश में हुइ होगी, उसे सरकार की तरफ़ से अनुदान मिलेगा और साथ ही साथ उसे टैक्स फ़्री किया जायेगा। मुलायम जी के सरकार में अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन की सभी फ़िल्मों को ये सुविधा प्राप्त हुइ, और इसके बाद यह नीति एक इतिहास बन के रह गई।

तो यह है हमारे सरकार की सच्चाइ, जो कि आम आदमी आम आदमी का नारा जपती है। सिनेमाघर मालिक असल में मालिक नही है बल्कि वे तो हमारे सरकार के हाथों के कठपुतली बन चुकी है। जब देखो ये टैक्स जब देखो वो टैक्स और हम भी कोइ सच्चाई जानने में कोइ दिलचस्पी नहीं रखते। बस जो देखते हैं वह कहते हैं। पर कभी कल्पना जरुर करियेगा इन सब बातों और शोषण के बीच एक सिनेमा मालिक कैसे अपनी जिन्दगी बसर कर रहा है। वह ना तो सिनेमा बन्द कर के बैठ सकता है और ना ही अपने इमारत का कोइ और उपयोग कर सकता है। आधी अधूरी बात सुन के कुछ भी कहना बहुत ही आसान है पर सच्चाई का सामन करना उतना ही कठिन।

Source : EDITORIAL

 

 

bhojpuriya cinema readers 1 comments posted (Showing 1 to 1)

Yes, indeed I do agree that this bad situation of cinema ghar is not only in UP. but you can see in Bihar, Jharkhand etc. I think blaming to state government would be one sided, we can equally blame to cinema ghar owner, public as well. If you move to south and western part of India, you can find good multiplexes, why not in U.P., Bihar.

Posted by : Shashikant Bhagat at 09:43:58 on 2011-06-03

 

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