भोजपुरी सिनेमा : तीसरे दौर के अंत की शुरुआत ?

2010-10-28

भोजपुरी सिनेमा : तीसरे दौर के अंत की शुरुआत ? आज से ७ साल पहले जब सुधाकर पाण्डेय की फिल्म "ससुरा बड़ा पैसावाला" आई थी, तब भोजपुरी सिनेमा अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी। पिछले ४५ सालों यह इंडस्ट्री २ बार मर चुकी थी और फिर से शुरुआत करना इतना आसान नहीं दिख रहा था। पर ससुरा बड़ा पैसावाला ने इस आशा को एक मजबूती दी और फिर शुरू हुआ भोजपुरी सिनेमा का तीसरा अध्याय। मनोज तिवारी, रवि किशन, दिनेश लाल यादव, पवन सिंह और तमाम कलाकार भोजपुरी के स्टार, सुपर स्टार, जुबली स्टार और सदाबहार नायक बनते चले गए। एकबारगी तो लगा कि इस अध्याय का अंत नहीं होगा, यह दौर भोजपुरी सिनेमा के लिए अमर साबित होगा। लेकिन आज, लगभग ७ सात साल बाद यह दावा खोखला पड़ता जा रहा है।

साल २०११, ५० में ५ भोजपुरी फिल्में ही सफल फिल्मों की लिस्ट हो पाई और २०१२ में भी अभी तक कोई ख़ास प्रदर्शन नहीं रहा है भोजपुरी फिल्मों का। बड़ी बड़ी फिल्में, भव्य सेट्स और तथाकथित स्टार्स कि मौजूदगी भी भोजपुरी फिल्मों का कोई भला नहीं कर पा रही हैं। अजब सा सन्नाटा पसरता जा रहा है भोजपुरिया बॉक्स ऑफिस पर। फिल्में आ रही हैं और हफ्ते भर में बोरिया बिस्तरा बाँध कर गायब होती जा रही हैं। हालत तो इतनी खराब हो चुकी हैं कि कुछ फिल्में तो अपना एक हफ्ता भी सिनेमाहाल में पूरा नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में निश्चित ही मन में यह शंका पैदा हो रही है कि कहीं यह भोजपुरी सिनेमा के तीसरे दौर के अंत की शुरुआत तो नहीं है।

एक तरफ जहां शुरुआत में भोजपुरी फिल्में २०-२० हफ्ते चलने का रिकार्ड बना रही थीं, वहीँ आज फिल्में २-३ हफ़्तों तक चल जा रही हैं तो फिल्म को हिट करार दिया जा रहा है। स्थिति तो इतनी खराब हो चुकी है की पहले जहां बड़ी बड़ी फिल्मों को निर्माता मनचाहे दाम पर वितरकों को बेचते थे, वहीँ आज उन फिल्मों का कोई खरीदार नहीं दिख रहा है। बड़ी बड़ी फिल्में साल भर से बन कर तैयार पड़ी हुई हैं पर सिनेमाहाल तक आने में इनके पसीने छुट जा रहे हैं। औसतन हर हफ्ते कम से कम एक भोजपुरी फिल्म का मुहूर्त हो रहा है पर उनका भी भविष्य कोई नहीं जानता।

भोजपुरी सिनेमा : तीसरे दौर के अंत की शुरुआत ?

इंडस्ट्री की हालत बुरी है, यह बात इंडस्ट्री का हर कोई आदमी जानता है, लेकिन तब भी हमारी स्थिति इतनी दयनीय है कि हमारे पास इस बात पर मंथन करने का समय नहीं कि हम किन किन कमियों के कारण लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। हर कोई फिल्म बनाने में इतना ज्यादा व्यस्त है कि किसी को इस बात की सुध नहीं है कि हमारे दर्शक लगातार क्यों हमारे फिल्मों को अस्वीकार कर रहे हैं। बहुत होगा तो हम लोगों से तो हम दुसरे की कमियाँ और गलतियाँ गिनाएंगे, इससे ज्यादा कोई भी अपेक्षा रखना अपराध माना जाएगा।

एक तरफ जब हम यहाँ बोल रहे हैं कि भोजपुरी फिल्मों की हालत खराब है, वही आपको इस इंडस्ट्री का कोई ऐसा निर्माता, निर्देशक, नायक या नायिका नहीं मिलने वाले जो की कहें, "हाँ मेरी फिल्में फ्लॉप हो रही है"। यहाँ हर निर्माता, निर्देशक, नायक और नायिका हिट हैं, सुपरहिट हैं, सुपर डुपर हिट हैं। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सफलता पर हर कोई अपने हिस्से की तारीफ ले जाता है पर आज जब हमारी स्थिति खराब है तो इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है।

भोजपुरी सिनेमा इंडस्ट्री की इतनी बुरी हालत भले ही हो, लेकिन अभी भी एक आशा की किरण बाकी है, शायद हम इंडस्ट्री के लोग इस सच्चाई को अपनाएं और कुछ नया करने की कोशिश करें, समय अभी भी है हमारे पास, बस उम्मीद यही करते हैं कि यह समय भी हम खोखले दावे करने में ख़त्म ना कर दें।

Source : EDITORIAL

 

 

bhojpuriya cinema readers 5 comments posted (Showing 1 to 5)

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Posted by : sanjeev at 14:35:28 on 2013-02-05

मैं आरा का रहने वाला हूँ जोकि भोजपुरी भासा का मुख्या केंद्र है लेकिन मैंने जितनी भी भोजपुरी फिल्मो को देखा है उसमे बोली को छोड़कर कुछ भी भोजपुरी नहीं रहता क्या आपलोगों को पता है की ये भोजपुरी संस्कृति का अनादर हो रहा है आज सिनेमा घरो में कोई लड़की या औरत इन फिल्मो को देखने नहीं जाती क्योंकि ये फिल्मे स्तरहीन हो चुकी है और जबतक हम महिलावो को इससे नहीं जोड़ेंगे तब तक इन फिल्मो का भला नहीं होने वाला है अतः अछी कहानी के साथ साफ सुथरी फिल्मांकन जरुरी है नहीं तो इससे कोई इनकार नहीं कर सकता धीरे धीरे भोजपुरी फिल्मो का सुनहरा अध्यइया समाप्त हो जायेगा

Posted by : AMIT KUMAR VENKTESHWAR at 12:54:08 on 2013-02-03

Mahoday ,Bhojpuri Filmo Ki Story Itni Kharab Ho Chuki Hai Ki Koi Bhi Admi Family Ke Saath To Nahin Dekh Sakta.Upar se fuhar item songs ka tadka.isme aap kya aspect kar sakte hain.

Posted by : PRAKASH KUMAR at 15:02:34 on 2012-12-15

सम्हलने के लिए असफलता आवश्यक होती है...सफल होने के लिए मौलिकता आवश्यक होती है...मौलिकता के लिए प्रतिभा आवश्यकता होती है...प्रतिभा के अभाव में असफलता सुनिश्चित है...और अगर असफलता सुनिश्चित है, तो सम्हालना भी सुनिश्चित है...और अगर सम्हलना सुनिश्चित है तो प्रतिभावान लोगों के लिए सफलता भी सुनिश्चित है...

Posted by : K. MANOJ SINGH film writer at 07:57:23 on 2012-03-04

wah kaun si aasha ki kiran aapko dikhi hai jiska ullekh aapne apne aalekh me nahi kiya ....?

Posted by : vijay pandey at 20:20:44 on 2012-02-29

 

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