क्या हम सच में भोजपुरी फ़िल्में बना रहे हैं ?

2010-9-19

क्या हम सच में भोजपुरी फ़िल्में बना रहे हैं ? कुछ दिनों पहले मुझे पुरानी भोजपुरी फ़िल्म "गंगा किनारे मोरा गाँव" देखने क सौभाग्य प्राप्त हुआ। और जब मैं यह फ़िल्म देख के उठा तो मेरे दिमाग में बस यही सवाल उठा, "क्या आज की भोजपुरी फ़िल्मों की तुलना हम इस फ़िल्म से कर सकते हैं ?" नही, बिल्कुल नहीं, ये तुलना करना बहुत गलत होगा, यह सवाल "गंगा किनारे मोरा गाँव" जैसे भोजपुरी फ़िल्म को अपमानित करने से कुछ कम न होगा। ये फ़िल्म हर क्षेत्र में आज की फ़िल्मों पर भारी, बहुत भारी पड़ती हैं। भोजपुरी फ़िल्मों के उस दौर में जहाँ आज फ़िल्मों की नींव पटकथा होती थी, वहीं आज पटकथा का ज़िक्र सबसे अंत में होता है, एक जैसे ही पटकथाओं को घीसते चले जा रहे हैं हम लोग। भोजपुरी फ़िल्मों में पटकथाओं की कमी का एक कारण ये भी है कि आज ज्यादातर निर्माता-निर्देशक दर्शकों को कुछ नया दिखाने में दिलचस्पी रखते ही नहीं हैं। अगर मैं गलत नहीं हूँ तो फ़िल्मों को कहानी के हिसाब से कटैगरी में बाँटा जाता है, कुछ एक्शन फ़िल्में, कुछ ड्रामा, कुछ थ्रिलर तो कुछ काँमेडी। पर हमारे इंडस्ट्री में शायद एक ही कटैगरी है : "रोमांटिक एक्शन फ़िल्म जिसमें काँमेडी का तड़का रहेगा"। इस आरोप को ये कह के भी गलत ठहराया जा सकता है कि दर्शक के माँग पर ही ऐसी फ़िल्में बनती हैं, पर माफ़ करें दर्शक ये तो नहीं कहती कि हमें "गंगा मय्या तोहरे पियरी चढ़इबो" और "गंगा किनारे मोरा गाँव" जैसी फ़िल्में नहीं चाहिये। हाँ, कारण ये हो सकता है कि जहाँ "गंगा मय्या तोहरे पियरी चढ़इबो" जैसी फ़िल्में बनाने के लिये हमें शानदार पटकथा और मेहनत की जरुरत होती है, वहीं आज की फ़िल्मों के लिये हमें "कोइ" भी पटकथा चुनकर फ़िल्म बनाने की तय्यारी करने लगते हैं। हम तो पैसे कमा के निकल जाते हैं पर दर्शकों के लिये हम ऐसा कुछ नहीं छोड़ते जिन्हें वे सालों बाद भी याद रखें।

हाँलीवुड में महान रचनाकार शेक्स्पियर के लगभग सब कहनियों पर फ़िल्मे बनाइ गई हैं और बनाइ जा रही हैं, तो क्या हमारे भोजपुरी साहित्य में कुछ ऐसा अनूठा और अनमोल रचना नही है जिसके उपर फ़िल्में बनाइ जा सके ? बाँलीवुड हो या हाँलीवुड, फ़िल्म इंडस्ट्री में हमेशा कुछ ऐसे हीरे निकले हैं जिन्होंने कुछ बेहतरीन विषयों पर फ़िल्में बनाई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से साहित्यिक रचनाओं को केंद्रित किया गया हैं। अगर हमें पटकथाओं की इतनी ही कमी है, तो क्या भोजपुरी साहित्य से प्रेरित होकर हम कोइ फ़िल्म नही बना सकते ? हमेशा से भोजपुरी फ़िल्मों क एक प्रमुख आकर्षण फ़िल्म का संगीत रहा है, पर आज के भोजपुरी फ़िल्मों में गीत संगीत का कुछ खास महत्व नहीं है। हाँ, ये बात तो है कि ज्यादातर हर फ़िल्मों में कम से कम 2-3 बार ऐसी परिस्थिति जरुर पैदा कि जाती है कि फ़िल्म क खलनायक एक आयटम डांसर के साथ नाच सके। एक समय भोजपुरी फ़िल्मों के गानों का ऐसा प्रभाव था कि लोग आज भी वही गाने गुनगुनाते मिल जाएंगे, पर आज के गानें शायद ही इतना प्रभाव रखते हैं कि फ़िल्म खत्म होने के बाद उन्हें फ़िर से सुनने का मन करे। धुन कहीं से चुराये हुये, बोल कही और से चुराये हुये, दोनो को मिलाइये और हो गया फ़िल्म का संगीत तय्यार।

जब बात गीत-संगीत पर आ ही गई है तो एक बात कहना चाहुँगा, हम जो अश्लील-अश्लील का रोना रोते हैं, दरअसल ये अश्लीलता नहीं बल्कि फ़ूहड़ता है, ये फ़ूहड़ता है उन लोगों कि जिनके पास फ़िल्म में दिखाने के लिये कुछ नहीं होता है तो ये ऐसे आपत्तिजनक चीज़ें डालकर ही दर्शकों को लुभाने की कोशिश करते हैं। जिस दिन हमारी फ़िल्मों में अच्छी पटकथा, संगीत, निर्देशन आ जायेगा, उसी दिन ये अश्लीलता गायब सी दिखेगी। भोजपुरी फ़िल्म अपनी माटी की सुगंध की वजह से जानी जाती थी, पर दुखद बात ये है कि अब हमारे निर्माता निर्देशक अपनी माटी को दक्षिण भारत और विदेशों में देखने की कोशिश कर रहे हैं। जिस माटी से हमारी इंडस्ट्री निकली है, आज हम उसी माटी के पास जाने से कतरा रहे हैं। फ़िल्म की पृष्ठभूमि तो हम आरा, पटना, छपरा आदि रखते हैं पर इन जगहों की एक भी खासियत हमें फ़िल्म में नही दिखती। कारण साफ़ है, पहले की फ़िल्में शौक से बनाइ जाती थी, कुछ नया, कुछ बढ़िया करने के शौक से, पर अब, पैस कमाने का शौक बाकि सभी शौकों पे भारी पड़ रहा है। ऐसा नही है कि कोशिशें नही हो रही है, पर ऐसे कोशिशों की मात्रा बहुत कम हैं जिससे ऐसी फ़िल्में कब आती हैं कब चली जाती हैं, पता ही नहीं चलता। और अगर भोजपुरी फ़िल्मों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की सोच सकते हैं। आज जरुरत है हमें एक आन्दोलन की, एकजुट होकर चिंतन करने की। जिस माटी ने हमें इतना कुछ दिया है, अब उसके लिये कुछ करने की… क्या आप तय्यार हैं ?

Source : EDITORIAL

 

 

bhojpuriya cinema readers 4 comments posted (Showing 1 to 4)

आज भोजपुरी तो महज तमाशा बन गयी है फुह्र्ता चरम पर है बस दलाली हो रही है yaha

Posted by : aman pratap at 19:43:37 on 2013-04-14

vartman main ban rahi bhojpuri film bhojpuri film hai hi nahi. ye ek tarah se pron film hai. na to koi hero hai na koi vilen- bhojpuri main kathit superstar ki film ki kahani main bhi patron ka charitr nirdharit nahi ho pata hai --

Posted by : krishna at 12:14:49 on 2012-11-18

Sach kaha aplogo ne aj kal bhojpuri film fuharta se bhari padi hai. Aj tak bahut hi kam aisi bhojpuri film mili hai jise hum apni puri family k sath dekh sake ye hamari soch kab khatam hogi k jab tak fuharta aur itom song na de wo film na chalegi pahle ap kosis to kijiye

Posted by : Tabrej shams at 22:30:40 on 2012-10-25

आप एकदम सही कह रहे है, मेरा मन्ना हैं की आप पहले पटकथा पर ध्यान दे और item सोंग्स को हटा दे तोह अभी व् भोजपुरी क्लास्सिक फिल्मे बन्सक्ति है.. भासा पर ध्यान दे...

Posted by : mithilesh chaurasiya nepal at 00:46:40 on 2012-04-09

 

bhojpuriya cinema readersSay something

related newsYou may like these

अच्छे कोशिश की तारीफ़ करिए, नहीं तो कुछ ना हो पाएगा सुर संग्राम 2 के बवाल का जिम्मेदार कौन ?भोजपुरी सिनेमा : तीसरे दौर के अंत की शुरुआत ? प्रकाश झा जी, भोजपुरी फिल्म कब बनायेंगे ?भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री : पब्लिसिटी के प्रति उदासीनताउत्तर प्रदेश में ख़त्म होता भोजपुरी फिल्मों का बाज़ार क्या फ़िल्मों के पोस्टरों की कोइ थीम होनी चाहिये ?५० सालों में अपनी राह भटक चुका है भोजपुरी सिनेमा

bhojpuri film's video trailersRelated Bhojpuri Videos

Rickshaw Wala I Love You Title Promo Rickshaw Wala I Love You Trailer 2 Dhadkela Tohre Naame Karejwa Trailer Rickshaw Wala I Love You Trailer