औलाद : फिल्म समीक्षा

09-07-2011

औलाद

दिनेश लाल यादव की औलाद को भोजपुरी सिनेमा के ५० साल पूरे होने पर दिनेश लाल यादव द्वारा भोजपुरी दर्शकों को एक तोहफा कह के प्रचारित किया जा रहा है।कहा जा रहा है यह फिल्म भोजपुरी दर्शक अपने परिवार के साथ बैठ के देख सकते हैं क्योंकि यह एक संपूर्ण पारिवारिक फिल्म है। तो क्या यह फिल्म सच में भोजपुरी दर्शकों के लिए एक तोहफा है ? क्या सच में यह एक संपूर्ण पारिवारिक फिल्म है ? इस सवाल का जवाब काफी हद तक हाँ में दिया जा सकता है। हाँ, यह फिल्म आप अपने परिवार के साथ बैठ के देख सकते हैं। हाँ, यह फिल्म इस दौर के अब तक के सबसे बेहतरीन कोशिशों में से एक है और हाँ, इस फिल्म को पूरी इमानदारी के साथ बनाया गया है।

निरहुआ इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ताजा प्रस्तुति औलाद कहानी है आरती(पाखी हेगड़े) की, जिसके पिता धरम देव को उससे इसलिए नफ़रत करते हैं क्योंकि वह लड़की की जगह अपनी पत्नी से एक लडके की आस लगाए हुआ था। आरती के जन्म के जहां एक तरफ उसकी माँ चल बसती हैं, वही दूसरी तरफ धरम देव आरती को अपनाने से इनकार कर देता है। आरती के पालन पोषण करने की जिम्मेदारी उसका मामा(मनोज टाइगर) लेता है। बड़ी होने के बाद आरती राधे(दिनेश लाल यादव) से प्यार करने लगाती है जो की उसके पिता के साथ २५ प्रतिशत का पार्टनर है। अपने पिता के मर्जी के खिलाफ आरती राधे से शादी कर राधे के घर में आती है, जहां राधे की माँ(किरण यादव) और छोटा भाई श्याम (प्रवेश लाल यादव) भी हैं। श्याम परिवार के सहमति से अपने सहपाठी प्रिया(शुभी शर्मा) से शादी करता है। पर कुछ अनहोनी घटनाओं के चलते राधे और आरती को अपने घर से अलग होना पड़ता है। आगे चलकर यह परिवार कैसे फिर से एक होता है, धरम देव का आरती के प्रति के नफ़रत कैसे ख़त्म होता है, यही औलाद के आगे की कहानी बनती है।

औलाद की सबसे बड़ी खासियत इस फिल्म की इमोशनल कंटेंट हैं। फिल्म के कुछ सीन्स कुछ ऐसे बन पड़े हैं कि दर्शक काफी हद तक भावुक हो जायेंगे। फिल्म का क्लाइमेक्स, पाखी द्वारा अवधेश मिश्र को बचाना, सोहर गाने के बाद के घटनाक्रम काफी हद तक फिल्म को दर्शकों से जोड़े रखते हैं। निर्देशक असलम शेख ने इन सीन्स को काफी बखूबी से अंजाम दिया है। फिल्म का सेकण्ड हाफ काफी प्रभावशाली है और दर्शकों को अपने साथ बांधे रखता है।

फिल्म की पटकथा भी फिल्म का एक महत्त्वपूर्ण और मजबूत अंग है। भ्रूण ह्त्या को केंद्रबिंदु बनाकर लिखी गई इस कथा ने यह साबित करने की कोशिश की है बेटी बेटा से कभी कम नहीं होती।भ्रूण हत्या हमारे समाज में हमेशा से एक अभिशाप रहा है और इस तरह की फिल्में हमारे समाज में कुछ अंतर तो पैदा कर ही सकती है। के.के सिंह और दिनेश लाल यादव को इस बात के लिए बधाइयां की इन्होने इस समस्या को दिमाग में लेकर फिल्म बनाने की सोची।

औलाद जहां तक कमजोरी की बात है तो फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है फिल्म की लम्बाई। मध्यांतर तक फिल्म में कुछ ख़ास घटनाक्रम नहीं होता है और लगातार गानों की वजह से भी फिल्म की गति रूक सी जाती है।

फिल्म में अदाकारी की बात करें तो यह फिल्म पाखी हेगड़े की सर्वश्रेठ फिल्मों में से एक मानी जायेगी। पाखी ने आरती के चरित्र को पूरे परिपक्वता के साथ निभाया है। दिनेश लाल यादव राधे की भूमिका में खरे उतरते हैं। शुभी शर्मा ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है। प्रवेश लाल यादव कुछ ख़ास नहीं कर सके हैं। मनोज टाइगर को कामेडियन के छवि से बाहर निकलते देखना एक अच्छा अनुभव था, यह रोल उनके सबसे अच्छे किरदारों में से एक माना जा सकता है। संजय पाण्डेय ने अपने रोल को बेहतरीन तरीके से निभाया है, बहुत ही शानदार और प्रभावशाली अभिनय रहा है उनका। अनिल यादव भी प्रभावी रहे हैं जबकि अवधेश मिश्रा ने निराश किया, उनके चेहरे पर पूरे फिल्म में एक सी ही अभिव्यक्ति रह जाती है। बाकी कलाकारों का अभिनय ठीक ठाक रहा है।

फिल्म का निर्देशन(असलम शेख) परिपक्व है। गीत(प्यारेलाल यादव, विनय बिहारी, श्याम देहाती) और संगीत(राजेश रजनीश) अच्छे हैं, खासकर चिट्ठी लिखतानी, सोहर गीत,जिनगी अन्हरिया में और देखनी ना माई तोहके काफी अच्छी रचनाएँ हैं। फिल्म के कथा, पटकथा और संवाद काफी अच्छे हैं। फिल्म की एडिटिंग(जीतेन्द्र सिंह जीतू) और चुस्त हो सकती थी। फिल्म के एक्शन सीन्स(आर.पी.यादव) कुछ ख़ास प्रभाव नहीं छोड़ते। अकरम खान की छायांकन अच्छी रही है।फिल्म की प्रोडक्शन वेल्यु फिल्म में साफ़ दिखाई पड़ती है।

कुल मिलाकर फिल्म के प्रथम हाफ की कमियों के बावजूद यह फिल्म भोजपुरी फिल्मो में एक मिसाल बनाकर उभरने का दम रखती है।मिसाल इस बात का कि भोजपुरी फिल्म के दर्शक अश्लीलता के हिमायती नहीं हैं। मिसाल इस बात का अच्छे कथा पटकथा के साथ भोजपुरी फिल्में भी करिश्में कर सकती हैं। इस फिल्म में इमानदारी झलकती है जो दर्शकों को प्रभावित करने में सक्षम रहेंगी।

Source : EDITORIAL

 

 

bhojpuriya cinema readers 21 comments posted (Showing 1 to 10)

जी मैं मुंबई मैं रहता हु ,इस पिचर के ट्रेलर देखने के बाद लगभग ६ महीने से इसका कैसेट दू ढ रहा हु ,पर मुझे नहीं मिला .कृपया इसे देखने लिए मैं किस साईट पैर जाऊ मुझे बतये .

Posted by : sandeep yadav at 10:00:17 on 2013-01-20

गुड मूवी औलाद

Posted by : jaisinghania at 15:58:57 on 2012-01-26

dinesh yadav ji aap se mera ek anurodh hai ki mai youtub pe aulad film ka ye ( e kun rog ye sajan hamra ke tu dahara dihla) vedio song khoj raha ghu mil nahi raha hai. aap net par ye gana dalwa dijiye.

Posted by : manoj at 16:02:44 on 2012-01-21

Dinesh Ji Namskar,Apke Acting me deshipan hai wo mujhe bahut bhata hai.mere pas bhi kuch achchhi story hai agar aap mauka de to apko suna sakta hun Bhojpuri cinema me kuch aisi film bhi ani chahiye jo hamare samaj aur sanskirti jivit rakhe.mujhe koi paisa nahi chahiye bas aap us story pe kam kikije nam chahiye paisa nahi kyunki apne samaj ke liye esse bada main abhi kuch nahi de sakta. Mahendra Prajapati Sampadak-SAMSAMYIK SRIJAN.KAVI Delhi Vishv-viddhyalaya 09871907081,08882719557

Posted by : Mamendra Prajapati at 15:12:44 on 2011-12-03

Nirahu Bhaiya Mujhe to apki film dekhne me bahut maza aata hai hum yahi chahenge ki aap aage v aisi hi superhit film ka nazara pesh karte rahe aur hum log aap ke film ka anand lete rahe.

Posted by : Ramanand Yadav at 14:05:15 on 2011-11-01

jab se maine suna hai ki aulaad pardarsit ho gai hai tabse hamare dil me utsukta bani rahti hai ki kab dekhe is film ko

Posted by : santosh kumar at 13:45:46 on 2011-08-11

It's one of the best film of Dinesh. I saw it in Anand Mandir in varanasi last week. I think Golu should have chosen as role of his brother insteat of Pravesh Lal Yadav. I think he has to learn something more about acting. Anyway it's a goood.

Posted by : Ratan dixit at 20:31:59 on 2011-07-22 See_User_Profile

It's one of the best film of Dinesh. I saw it in Anand Mandir in varanasi last week. I think Golu should have chosen as role of his brother insteat of Pravesh Lal Yadav. I think he has to learn something more about acting. Anyway it's a goood.

Posted by : Ratan dixit at 20:31:59 on 2011-07-22 See_User_Profile

AULAD BAHUT ACCHI FILM HAI AUR AGE BHI ISI TARAH KI FILM BANANA NIRAHUBHAI BEST OF LUCK

Posted by : MITHILESH YADAV AZAMGARH at 12:37:43 on 2011-07-20

iss koshish ki taareef karni hogi, nahi to bhojpuri sinema fir se purane dharre par chala jaega. bahut baghiya kosis

Posted by : Mohammad Akeel at 14:45:56 on 2011-07-11

 

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